छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में अब प्रीपेड बिजली मीटर अनिवार्य
छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में अब मोबाइल की तरह प्रीपेड बिजली मीटर लगेंगे। केंद्र से अनुदान रुकने और करीब 3432 करोड़ रुपये के बकाए के बाद सरकार ने यह सख्त फैसला लिया है।
छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में अब प्रीपेड बिजली मीटर लगाए जाएंगे। बिना रिचार्ज कराए अब दफ्तरों में बिजली नहीं मिल सकेगी। केंद्र सरकार से मिलने वाला वित्तीय अनुदान रुकने के बाद यह फैसला हुआ। सरकारी विभागों पर बिजली कंपनी का भारी बकाया पैसा जमा है। बकाया राशि को किस्तों में चुकाने के लिए सख्त नियम बने हैं। छत्तीसगढ़ के सरकारी कार्यालयों को अब आम उपभोक्ताओं की तरह बिजली इस्तेमाल करनी होगी। बिजली खर्च करने से पहले मोबाइल की तरह रिचार्ज कराना अनिवार्य होगा। राज्य के ऊर्जा विभाग ने इस नई व्यवस्था का आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग और बिलिंग प्रणाली को लागू करने के लिए है।दरअसल भारत सरकार की एक खास वितरण क्षेत्र योजना चल रही है। इस योजना की शर्तें पूरी न होने पर राज्य को झटका लगा है। केंद्र सरकार ने मिलने वाले अनुदान की एक-तिहाई राशि रोक दी है। इस बड़े वित्तीय नुकसान के बाद राज्य सरकार तुरंत हरकत में आ गई। दो चरणों में लागू होगी नई व्यवस्था सरकार ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में 1 अगस्त 2026 से नया नियम लागू करने का निर्णय हुआ। पहले चरण में ब्लॉक और उससे उच्च स्तर के दफ्तर शामिल होंगे। इन सभी शासकीय कनेक्शनों में प्रीपेड बिलिंग पूरी तरह अनिवार्य होगी। इसके बाद दूसरे चरण का काम शुरू किया जाएगा। दूसरे चरण में निचले स्तर के सभी सरकारी कार्यालयों को कवर किया जाएगा। अब किसी भी सरकारी विभाग को बिना पैसे दिए बिजली नहीं मिलेगी। इससे सरकारी विभागों में बिजली की बर्बादी भी काफी कम हो जाएगी। पुराना बकाया बिल किया गया फ्रीज :: सरकारी विभागों पर बिजली बिल का बहुत बड़ा पैसा बकाया है। मार्च 2026 तक यह बकाया राशि 2883.42 करोड़ रुपए थी। जून 2026 तक इसके 3432.64 करोड़ रुपए होने का अनुमान लगाया गया है। सरकार ने इस पूरी पुरानी बकाया राशि को अब फ्रीज कर दिया है। यह कदम 30 जून 2026 की स्थिति में उठाया गया है। इस भारी-भरकम राशि को चुकाने के लिए एक प्लान बनाया गया है। विभागों को यह राशि चार त्रैमासिक किस्तों में जमा करनी होगी। यह पैसा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI - State Bank of India) की रायपुर कमर्शियल ब्रांच में जमा होगा। भुगतान के लिए समय सीमा भी तय कर दी गई है। लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई :: सरकार ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है। सभी विभागों को 31 मार्च 2027 तक अपना बकाया शून्य करना होगा। तय समय पर भुगतान न करने वाले विभागों पर कार्रवाई होगी। इसके साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बिजली कंपनी अब किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। हर सरकारी विभाग को अपने सभी कनेक्शनों का एक ग्रुप बनाना होगा। बिजली कंपनी इस ग्रुप को एक यूनिक ग्रुप आईडी (ID - Identification) देगी। इससे सभी कनेक्शनों की निगरानी एक साथ आसानी से हो सकेगी। एसएमएस से मिलेगा अलर्ट :: हर विभाग में एक प्रीपेड नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। इस अधिकारी का मोबाइल नंबर बिजली कंपनी के पास रजिस्टर्ड रहेगा। जब भी दफ्तर का बिजली बजट खत्म होने वाला होगा, अलर्ट भेजा जाएगा। बैलेंस शून्य होने के 7 दिन, 3 दिन और 1 दिन पहले मैसेज आएगा। यह अलर्ट एसएमएस (SMS - Short Message Service) और व्हाट्सएप के जरिए भेजा जाएगा। महीने के अंत में बैलेंस माइनस रहने पर सरचार्ज का प्रावधान है। हालांकि महीने के बीच में बैलेंस माइनस होने पर राहत मिलेगी। अगर आखिरी तारीख से पहले रिचार्ज कर लिया तो सरचार्ज नहीं लगेगा। बैलेंस शून्य होने पर भी विभागों को थोड़ी मोहलत दी जाएगी। तिमाही समाप्त होने के बाद भी 15 दिनों तक बिजली नहीं काटी जाएगी।



