एकलव्य आवासीय विद्यालय पथर्रीडीह के 13 विद्यार्थियों ने NEET 2026 क्वालिफाई किया
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों के अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तथा समग्र व्यक्तित्व विकास के अवसर उपलब्ध कराना है।

धमतरी । दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रतिस्पर्धी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित शासन की महत्वाकांक्षी एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS) योजना आज सार्थक परिणाम दे रही है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, पथर्रीडीह ने वर्ष NEET-2026 में उल्लेखनीय सफलता अर्जित कर जिले को गौरवान्वित किया है। वनांचल के इस आवासीय विद्यालय से इस वर्ष 24 विद्यार्थियों ने NEET-2026 परीक्षा में भाग लिया, जिनमें से 12 विद्यार्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर सफलता प्राप्त की है। इन विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन से अब दूरस्थ ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों के अनेक प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं के लिए चिकित्सा शिक्षा के द्वार खुल गए हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि उचित मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण मिलने पर ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्र के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। विद्यालय के विद्यार्थियों में राधेश्याम ने 388 अंक (88.49 परसेंटाइल) प्राप्त कर सर्वाेच्च प्रदर्शन किया। इसके अलावा डिंपल कंवर (349 अंक), मनीषा (300 अंक), पूर्णिमा (300 अंक), दयानंद मरकाम (280 अंक), दिव्या (271 अंक), हरिकेश कुमार (263 अंक), सोनम दीवान (244 अंक), मेनका (220 अंक), प्रीति कश्यप (196 अंक), गुंजा (182 अंक), आराधना (180 अंक), रितु ध्रुव ने भी सफलता प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों के अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तथा समग्र व्यक्तित्व विकास के अवसर उपलब्ध कराना है। पथरीडीह विद्यालय की यह उपलब्धि शासन की जनजातीय शिक्षा को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता और शिक्षकों के समर्पित प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण है।



