Supreme Court News: अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त अंतरिम जमानत, सुनवाई पूरी होते तक छत्तीसगढ़ से रहना होगा बाहर
अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त अंतरिम जमानत

रायपुर। 05 अगस्त 2026| छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड घोटाला CSMCL में कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त अंतरिम जमानत दे दी है। जेल से रिहाई के बाद छत्तीसगढ़ छोड़ना होगा। यह निर्वासन सुनवाई पूरी होते तक जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त अंतरिम जमानत देते हुए कहा है,CSMCL घोटाले की ट्रायल पूरी होते तक छत्तीसगढ़ बाहर रहना होगा। छत्तीसगढ़ छोड़ने से पहले उन्हें अपने रहने का पता और मोबाइल नंबर संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराना होगा। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच में हुई है। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है, ट्रायल के दौरान जब भी अदालत बुलाएगी, अनवर ढेबर को पेश होना होगा। सुनवाई के दौरान अनवर ढेबर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा, छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने पैरवी की। अभियोजना की आशंका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये निर्देश सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से कहा कि यदि अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ में रहते हैं तो गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए जमानत की शर्त के रूप में उन्हें राज्य से बाहर रहने का निर्देश दिया। साथ ही अधिकारियों को अपना वर्तमान पता और संपर्क नंबर देने के लिए भी कहा गया है। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी जमानत याचिका बता दें, 13 मई को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से राज्य सरकार के निगम में गहराई तक फैले एक संगठित भ्रष्टाचार तंत्र का संकेत मिलता है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, सार्वजनिक धन से जुड़े आर्थिक अपराध सामान्य अपराधों की तुलना में अधिक गंभीर होते हैं। ऐसे मामलों में बड़े पैमाने पर जनता के पैसे के नुकसान और सुनियोजित साजिश की आशंका रहती है, जिसका असर व्यापक स्तर पर पड़ता है। इसलिए ऐसे मामलों में जमानत पर विचार करते समय विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। पढ़िए क्या है CSMCL घोटाला यह मामला आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा EOW और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ACB ने भारतीय दंड संहिता IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, CSMCL में कथित तौर पर एक संगठित तंत्र काम कर रहा था। आरोप है कि मैनपावर सप्लाई एजेंसियों से उनके वैध बिल और बकाया राशि मंजूर कराने के बदले अवैध कमीशन लिया जाता था। यह रकम कथित तौर पर बिचौलियों के माध्यम से संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाती थी। जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर एजेंसियों का दावा है कि कई एजेंसियों को भुगतान जारी कराने के लिए कथित रूप से कमीशन देने के लिए मजबूर किया जाता था। इसी मामले में अनवर ढेबर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।



