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सरकार केवल बस्तर तक सीमित राजधानी अपराधियों के हवाले छोड़ी सरकार ने : नगर निगम के पूर्व महापौर कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे

चंगोरा भाटा में हुई दो मर्डर के बाद 20 दिन में 12 मर्डर रायपुर में हो चुके : नगर निगम के पूर्व महापौर कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे

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BASANT SACHDEV
वरिष्ठ संवाददाता
26 दिन पहले 215 मिनट पढ़ें
सरकार केवल बस्तर तक सीमित राजधानी अपराधियों के हवाले छोड़ी सरकार ने :   नगर निगम के पूर्व महापौर कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे

रायपुर : नगर निगम को पूर्व महापौर कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे ने आज डी डी नगर थाने के घेराव के दौरान बताया कि रायपुर में चांगोरा भाटा भाटा गांव संतोषी नगर मोवा सड्डू रामनगर कुकुर बेड़ा सहित कुछ संवेदनशील क्षेत्र ऐसे हैं जहां हर महीने 5 से 7 हत्याएं एवं सर्वाधिक नशे की सामग्री खपत की जाती है। 24 घंटे नशे का सामान चांगोरा भाटा में आसानी से मिलता है। डीडी नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत लगभग पौने दो लाख की जनसंख्या के लिए उक्त थाने में मात्र 45 पुलिस कर्मियों की ड्यूटी होती है अगर 12 घंटे की ड्यूटी को जोड़ ले तो दिन में 20 और रात में 20 पुलिस इतने बड़े क्षेत्र को कंट्रोल करती है। स्वाभाविक है इतने कम बल में मात्र 15% क्षेत्र कवर हो पता है बाकी क्षेत्र अपराधियों के नियंत्रण में होता है। पूरी सरकार एवं जनप्रतिनिधि तथा गृह मंत्री केवल बस्तर तक सीमित हो गए हैं ।राजधानी की चिंता शायद विधायकों और मंत्रियों ने भी करनी बंद कर दी है। केवल भाजपा नेताओं के परिवार शायद सुरक्षित होंगे अन्यथा कौन कब कहां किसकी हत्या कर देगा पता नहीं ।आज तक के कभी चारों विधायकों को न पुलिस विभाग की समीक्षा करते देखा गया ना कभी थानों में बल की कमी को पूरी करने के लिए कोई ठोस प्रस्ताव पर बात करते पाए गए ।मंत्री से लेकर भाजपा के जन् प्रतिनिधि बस मां के नाम में पेड़ लगाने, तिरंगा यात्रा करने, कावड़ यात्रा करने को ही अपना काम दायित्व मान लिए हैं। 2 साल से कभी भाजपा के विधायक या मंत्री रायपुर में अपराध की या थाना में पर्याप्त पुलिस की व्यवस्था कैसे हो इस पर चर्चा नहीं करते ना ही कोई इस विषय में गृह मंत्री से मांग करते। रायपुर पूर्णतया अपराधियों के संरक्षण का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है सात राज्यों के बीच में नशे का सबसे बड़ा टर्मिनल रायपुर को ही बनाकर सुरक्षित स्थान मान लिया गया है। सरकार के लिए राजधानी के अपराध गंभीरता की श्रेणी में शायद नहीं आते इसीलिए ना अपराधी कम होते ना अपराध कम होते ।चंगोराभाठा, भाटा गांव जैसे कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां रात को 8:00 बजे के बाद कोई घर से बाहर नहीं निकल सकता,,यहाँ पुरा अपराधियों का साम्राज्य बना होता है। प्रमोद दुबे ने चांगोरा भाटा में अलग से थाना बनाने की मांग की है ताकि आने वाले समय में जनसंख्या को देखते हुए पुलिस का नियंत्रण हो सके ।सुशासन त्यौहार में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मंच से पुलिस से पूछा था कि सर्वाधिक नशा की सामग्री चंगोराभाठा में बगैर पुलिस की जानकारी के कैसे बिकती होगी।उन्होंने उसी समय कड़ी कार्यवाही करने की बात कही थी लेकिन कोई असर नहीं दिखा।जनसंख्या और छेत्र के फैलाव को देखते हुए चंगोराभाठा में एक सर्व सुविधा युक्त थाना खुलेगा तब ही कुछ हो पायेगा अन्यथा पुलिस के हाथ से ये छेत्र निकल जायेगा।

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